🫓 १. थालीपीठ – महाराष्ट्र की पौष्टिक पारंपरिक डिश
परिचय:
थालीपीठ महाराष्ट्र के हर रसोईघर में प्यार से बनने वाली एक पौष्टिक और स्वादिष्ट पारंपरिक डिश है।
सुबह के नाश्ते में, टिफ़िन के लिए या हल्के दोपहर के खाने में — थालीपीठ हर समय पसंद किया जाता है।
विभिन्न अनाज, आटे, सब्जियों और मसालों का यह मिश्रण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक और पाचन में हल्का होता है।
आज हम देखेंगे कि पारंपरिक तरीके से फाइबर और प्रोटीन से भरपूर थालीपीठ कैसे बनाया जाता है।
सामग्री (४ व्यक्तियों के लिए):
- भाजणी आटा – 2 कप (चावल, चना दाल, उड़द दाल और मूंग दाल को भूनकर बनाया गया मिश्रण)
- प्याज – 1 बड़ा (बारीक कटा हुआ)
- हरा धनिया – 1 टेबलस्पून
- अजवाइन – ½ टीस्पून
- हल्दी – ¼ टीस्पून
- लाल मिर्च पाउडर – 1 टीस्पून
- नमक – स्वादानुसार
- पानी – आटा गूँथने के लिए
- घी / तेल – सेंकने के लिएविधि:
- एक बड़े बर्तन में भाजणी आटा, प्याज, हरा धनिया, अजवाइन, हल्दी, मिर्च पाउडर और नमक मिलाएँ।
- थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर ऐसा नरम आटा गूँथें जिसे हाथ से थपथपाकर फैलाया जा सके।
- एक प्लास्टिक शीट या गीले कपड़े पर थोड़ा घी लगाकर हाथ से थालीपीठ थापें।
- बीच में एक छोटा छेद करें ताकि भाप निकल सके।
- गरम तवे पर दोनों ओर से घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा सेकें।
- दही, अचार या लहसुन की चटनी के साथ गरमागरम परोसें।
पोषण मूल्य:
- फाइबर और प्रोटीन से भरपूर, साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए उपयुक्त है।
- वजन घटाने वालों के लिए भी लाभदायक।
- सुबह के पौष्टिक नाश्ते के लिए आदर्श विकल्प।
टिप्स:
- चाहें तो इसमें बारीक कटी हुई मेथी, गाजर या लाल कद्दू डाल सकते हैं।
- सर्दियों में थोड़ा अदरक और लहसुन मिलाने से स्वाद और बढ़ जाता है।
थालीपीठ के प्रकार:
- साबूदाना थालीपीठ – उपवास के लिए
- रवा (सूजी) थालीपीठ – झटपट तैयार होने वाला
- नाचनी (रागी) थालीपीठ – लो-ग्लूटन और पौष्टिक विकल्प
निष्कर्ष:
थालीपीठ सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि महाराष्ट्रीयन परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है।
यह स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और हर घर में अपनी अलग शैली में बनने वाली डिश है
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